1. धरती को सूखा किनारा मत बनाओ Duet
Theme/Mood: A shared appeal to protect the earth from becoming barren, neglected, and lifeless. The duet can represent two voices—humanity and nature, or two caring people—asking for love, responsibility, water, greenery, and balance.
Mood: Emotional, soulful, concerned, and poetic, gradually rising into hope, unity, and a call to heal the planet.
Social folk ballad, acoustic world music, cinematic devotional anthem
2. Lyrics
[Verse 1]
नदी जब राह से बिछड़ गई,
सूखा किनारा बन गई।
किनारे की ये चाह न थी,
यूँ वीराना बन गई।
जब इंसान इंसान से टूट गया,
संसार चुपचाप रोने लगा।
दुनिया की ये चाह न थी,
युद्ध का अँधेरा होने लगा।
सीमाएँ कागज़ पर खिंची हैं,
आकाश तो सबका एक ही है।
रक्त सभी का लाल बहता,
आँसू का स्वाद भी एक ही है।
[Pre-Chorus]
देश को देश बनाने को,
लोगों का साथ जरूरी है।
विश्व को विश्व बनाने को,
ममता और प्यार जरूरी है।
शहर को चाहे दीवारें चाहिए,
किले, सड़क, बाज़ार चाहिए।
लेकिन धरती को जीने के लिए,
शांति भरे दिलदार चाहिए।
[Chorus]
धरती को सूखा किनारा मत बनाओ,
जीवन को नदी सा बहने दो।
नफरत की आग मत जलाओ,
बच्चों के सपने रहने दो।
हाथ छूटे तो युद्ध होता है,
हाथ मिले तो राह बनती है।
दिल जब दिल को पहचानता है,
दुनिया एक घर बनती है।
[Verse 2]
कहीं भूख से बच्चा रोता,
कहीं अन्न फेंका जाता है।
कहीं दवा बिना लोग मरते,
कहीं शक्ति गिनी जाती है।
कहीं शहर उजियारे में चमके,
कहीं गाँव अँधेरे में सोता है।
कैसा विकास है वह दुनिया का,
जहाँ इंसान इंसान से डरता है?
[Pre-Chorus 2]
शांति बिना विकास अधूरा,
न्याय बिना समृद्धि खोखली।
भाईचारे बिना जग अँधा,
करुणा बिना बुद्धि भी अधूरी।
[Chorus]
धरती को सूखा किनारा मत बनाओ,
जीवन को नदी सा बहने दो।
नफरत की आग मत जलाओ,
बच्चों के सपने रहने दो।
हाथ छूटे तो युद्ध होता है,
हाथ मिले तो राह बनती है।
दिल जब दिल को पहचानता है,
दुनिया एक घर बनती है।
[Bridge]
मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुम्बा,
नाम अलग हैं, प्रार्थना एक।
भाषा अलग है, भेष अलग है,
पर दिल की धड़कन रहती एक।
किसी का देश जब जलता है,
धुआँ हमारे आकाश में आता।
किसी का बच्चा जब रोता है,
मानवता का दिल दुख जाता।
[Verse 3]
नदी को फिर से राह दे दो,
जंगल को फिर साँस दे दो।
भूखे को रोटी दे दो,
डरे हुए को हाथ दे दो।
विज्ञान मानव के काम आए,
शक्ति शांति के नाम आए।
विकास उसी दिन पूरा होगा,
जब संसार सबके काम आए।
[Final Chorus]
धरती को सूखा किनारा मत बनाओ,
जीवन को नदी सा बहने दो।
नफरत की आग मत जलाओ,
बच्चों के सपने रहने दो।
हाथ छूटे तो युद्ध होता है,
हाथ मिले तो राह बनती है।
प्रेम से जब आँख मिलती है,
दुनिया एक घर बनती है।
[Outro]
नदी जब राह से बिछड़ गई,
सूखा किनारा बन गई।
किनारे की ये चाह न थी,
यूँ वीराना बन गई।
मानवता अगर सूख गई,
संसार भी ढहने लगता है।
धरती की ये चाह नहीं थी,
कि मनुष्य मनुष्य से डरता है।
3. Vocal & Musical Prompts
4. Listen/Watch
MP3 Version Available for Download
Free-Listening Version Only
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